नोटबंदी का आज 32वां दिन है। बैंकों और एटीएम के बाहर लोगों की लंबी कतार लगी हुई है। इस दौरान परेशान लोग मोदी सरकार और रिजर्व बैंक के इंतजाम पर सवाल खड़े कर रहे हैं। लेकिन परेशान जनता को वादे के अलावा अभी तक कुछ हाथ नहीं लगा है। असल में उसकी सोच ये है कि नोटों की किल्लत से डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा मिलेगा।
नोटबंदी पर सरकार लोगों से कर रही है वादे
परेशान लोगों के सवाल पर पीएम मोदी और उनकी पार्टी की तरफ से लोगों को सिर्फ वादे मिल रहे हैं अब ये दलील सामने आ रही है कि नए नोटों की कमी कहीं सरकार की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा तो नहीं। नोटबंदी के एक महीने बाद भी नये नोट आसानी से मिल नहीं रहे। लेकिन कहीं ऐसा तो नहीं कि ये मोदी सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। असल में उसकी सोच ये है कि नोटों की किल्लत से डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा मिलेगा और 500 और 2000 रुपये के नये नोट आसानी से काले धन के तौर पर इकट्ठा नहीं होंगे।
आरबीआई की है ये कोशिश
दरअसल सरकार की सोच ये है कि बड़े करेंसी नोटों की आसानी से उपलब्धता काले धन का संकट फिर से खड़ा करेगी। इसलिए सरकार की कोशिश है कि बड़ी मात्रा में नये करेंसी नोट फिर से काला धन इकट्ठा करने वालों के पास न पहुंच जाएं। इसके लिए सरकार और रिजर्व बैंक ये कोशिश कर रहे हैं कि नए नोट आसानी से वैसे लोगों तक न पहुंचे जो काले धन के कारोबार से जुड़े हैं। सरकार इसके लिए एक तरफ जहां कैशलेस, डिजिटल ट्रांजेक्शन को प्रोत्साहित करने में लगी है, वही इस बात की भी सावधानी बरत रही है कि बड़े करेंसी नोट आसानी से उपलब्ध ही न हों।
No comments:
Post a Comment